ट्रैफिक चालान का पैसा कहां जा रहा है? - Technopediasite

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Friday, September 13, 2019

ट्रैफिक चालान का पैसा कहां जा रहा है?

ट्रैफिक चालान का पैसा कहां जा रहा है : आज एक बार फिर www.technopediasite अपने टॉपिक से हट कर एक अलग आर्टिकल प्रकाशित करने जा रहा है क्यूंकि इससे भारत की जनता बहुत दुखी है. नया मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) लागू होने के बाद ट्रैफिक नियमों (traffic rules) के उल्लंघन पर भारीभरकम जुर्माना (fine) लगाया जा रहा है जिस के कारण हर एक भारतीय की जुबान पर यही है की मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी ".
ट्राफ्फिक चालान के कारण ऐसा लगता है की देश में किसी ने आक्रमण कर दिया है और लूट चल रही  है, भारत की जनता में त्राहि त्राहि का आलम है, नया नियम लागू होते ही ऐसा लगता है की पुलिस को दूसरा कोई काम ही नहीं बचा है,रोड पे आम जनता कम और पुलिस ज्यादा दिखाई दे रही है.गाडी देखते ही ये पुलिस भूखे भेड़िए की तरह टूट पड़ते हैं फिर जनता दिल में ही बोलती है की " अब होगा क्या मेरा हाल राम जाने ".

भारत में न्य ट्रैफिक नियम लागू और चालान की वसूली
ट्रैफिक नए नियम के कारण देश में हाहाकार

अंग्रेजी शासन या भारतीय शासन

हम सब भारत में अंग्रेजी शासन तो नहीं देखे हैं केवल सुने ही है लेकिन आज कल के हालात देखते हुए ऐसा लग रहा है कि अंग्रेजी शासन कुछ इसी तरह की रही होगी ! अचानक कोई फरमान जारी कर दिया जाता होगा और भारत की गुलाम जनता को ना चाहते हुए भी मानना पड़ता होगा !

उस समय भारत गुलाम था और भारत के लोग ग़ुलामी में ज़िन्दगी गुज़ार रहे थे इसलिए बेबस थे लेकिन ऐसा लगता है कि भारत के लोग आज भी मानसिक रूप से ग़ुलाम ही है,जनता के हित में सोचना सरकार का काम होता है, लेकिन पिछले कुछ बातों पे नज़र डाला जाये तो ऐसा लगता है की जनता के हित में सोचना सरकार का काम नहीं है!

अचानक फरमान जारी होता है की रात 12 बजे से पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट अब रद्दी कागज़ के सिवा कुछ भी नहीं, फिर भारत की जनता रोड पे, लाइन में, बैंक में टूट पड़ती है,जनता मरती है तो मरने दो, पैसे के कारण किसी की शादी टूट गयी तो कोई बात नहीं, करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए तो कोई बात नहीं!

ठीक नोट बंदी की तरह ये नया मोटर व्हीकल एक्ट का भी मामला हुआ है, ट्रैफिक नियम लगते ही ऐसा लगता है की ना पुलिस के पास कोई दूसरा काम है और ना ही जनता के पास कोई दूसरा काम है बस एक ही बात एक ही फिक्र गाडी ले कर बाहर कैसे निकले? जितनी की गाडी नहीं उससे ज्यादा का चालान भरना पड़ रहा है!

केवल नियम या सुविधा भी

केवल नियम लागू करना ही सरकार का काम नहीं है, कोई भी नियम लागू करने से पहले उसको पालन करने के लिए सुविधा देनी पड़ती है, भारत सरकार के पास ड्राइविंग लाइसेंस देने के लिए क्या सुविधा है?क्या हर जगह ड्राइविंग स्कूल उपलब्ध है जहाँ ड्राइविंग टेस्ट दे कर आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया जा सके?ड्राइविंग स्कूल और लाइसेंस में कोई असानी तो नहीं है लेकिन इसके लिए दलाल हर जगह जरूर उपलब्ध हैं!

इन्शुरन्स के लिए भी कुछ इसी तरह कोई सुविधा नहीं है कि नियम के अनुसार कोई इन्शुरन्स करवा सके, जिस इन्शुरन्स कंपनी को जितनी मर्ज़ी होती है उसी के अनुसार इन्शुरन्स बना देते है! सरकार के पास कोई ऐसा डिपार्टमेंट नहीं है जहाँ हर साल अपनी गाडी को चेक करवाएं कि यह रोड पे चलने के लायक है भी या नहीं, जहाँ इन्शुरन्स, लाइसेंस, पोलुशन और गाडी की सभी टेक्निकल जांच की जाये, और अगर कोई कमी हो तो उसी डिपार्टमेंट में बिना रिश्वत के उचित लागत ले कर जरूरत के सभी पेपर प्रदान की जाये!ट्रैफिक के नए नियम कायदों के बीच कुछ सवालों के जवाब जानना दिलचस्प होगा. मसलन ट्रैफिक पुलिस (traffic police) के भारीभरकम जुर्माना वसूलने से किसको फायदा हो रहा है?

देश की आर्थिक मंदी क्या चालान से ठीक होगी

देश की आर्थिक मंदी को ठीक करने के लिए बैंक कर्मचारी को सौंपा गया था,काफी प्रयास के बाद भी बैंक कर्मचारी देश को आर्थिक मंदी से बाहर नहीं निकाल पाए, इसलिए ऐसा लगता है कि यह भार पुलिस वालों को दिया गया है क्यों कि पुलिस वाले अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाते है!

नया मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) लागू होते ही ऐसा लग रहा है कि देश में कोहराम मच गया है, पुलिस कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी बहुत अच्छी तरह से निभा रहे हैं, कहीं चप्पल से तो कहीं थप्पर से मार खा रहे हैं लेकिन चालान में कोई कमी नहीं आने दे रहे हैं, अब ऐसा भी नहीं है कि केवल मार खा रहे हैं, वाहन चालक को पुलिस वाले भी लाठी से खूब धुलाई कर रहे है जैसे आम कोई जनता नहीं आतंकवादी हो! गाज़ियाबाद के इलाके में पुलिस से नोक झोंक के दौरान एक बेचारे सॉफ्ट इंजीनियर की मौत भी हो चुकी है!

देश में कुछ भी हो,आम जनता को कोई भी परेशानी हो इससे सरकार पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है, अब सवाल यह पैदा होता है की भारीभरकम जुर्माना वसूलने से किसको फायदा हो रहा है? चालान की रकम कहां जमा की जाती है? नए ट्रैफिक कानून के लागू होने के बाद चलान के जरिए कहां और कितनी वसूली हुई है!


चालान का पैसा कहां जा रहा है

वैसे जिस राज्य में जितने भी चालान काटता है उसी राज्य को पूरा पैसा जाता है, हकीकत ये है कि इससे राज्य सरकारों को ही फायदा होता है. जुर्माने की रकम राज्य सरकार के खजाने में जमा होती है, अगर हकीकत यही है तो फिर नया मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) लागू करने से कुछ राज्य इंकार क्यों कर दिए हैं? यह सोचने का विषय है!

कुछ राज्य जैसे- गुजरात, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्णाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने नया मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) लागू करने से इंकार कर दिया है, क्या एक भारत में अलग अलग राज्य के लिए अलग अलग कानून होगा?कुछ मीडिया वाले इससे राज्य राजनीतिक विरोध बता रहे हैं लेकिन दाल में कुछ तो काला है, नया मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) लागू होते ही ऐसा लग रहा है की बस देश में यही एक कानून है इसके सिवा कोई दूसरा कानून ही नहीं है!

ऐसा लगता है की ये बात केवल लोगों को बताने के लिए है की ट्रैफिक पुलिस चालान से वसूली गई रकम राज्य सरकार की ट्रेजरी में जमा करती है, मान लीजिये अगर बिहार में किसी का ट्रैफिक चालान कटता है तो चालान की रकम बिहार सरकार के खजाने में जमा होगी.लेकिन सच्चाई कुछ और ही लग रही
 है!

1 सितंबर से नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू हुआ है. हालांकि कई राज्यों ने जैसे-गुजरात, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, कर्णाटक, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल इसे अब तक लागू नहीं किया है, बताया जा रहा है की हरियाणा और ओडिशा ने नए एक्ट को अपने यहां लागू किया. इनदोनों राज्यों की ट्रैफिक पुलिस ने पहले चार दिनों मे ही बंपर जुर्माना वसूल किया.

पुरे भारत में ट्रैफिक चालान की कितनी वसूली हुई है 

अगर 6 महीने तक ऐसी ही वसूली चलती रही तो भारत से आर्थिक मंदी ऐसे गायब होगी जैसे गधे के सर से सींग, लगता है जो काला धन 15 लाख हर भारतीय को मिलना था वह मिल गया है और उसे वापस लिया जा रहा है, काला धन भारत के बाहर नहीं था भारत के अंदर ही है जिसको निकाला जा रहा है,हर भारतीय को 15 लाख रूपया भारत सरकार को वापस करना ही पड़ेगा!

भारत सरकार को जनता से कितनी कमाई हुई इस बात पर चर्चा कर रहे हैं,-
ओडिशा = 88.90 लाख रुपए
हरियाणा = 52.32 लाख रुपए
बेंगलुरु = 72 लाख 49 हजार 900 रुपए

अभी दूसरे राज्य और शहरों की जानकारी नहीं मिल पायी है लेकिन अंदाजा लगाय जा रहा है की अभी तक लगभग 50 करोड़ रूपया जनता से वसूली की जा चुकी है,अब आगे और कितनी होगी अभी यह कहना बहुत मुश्किल बात है! 


मैं आप को यह भी बताता चलूं कि नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने से डीजल और पेट्रोल की बिक्री में 25% की गिरावट आई है,बाजार में दूकानदार कबूतर उडा रहे हैं क्यूंकि कोई ग्राहक मार्किट नहीं जा रहा है,हर तरफ मंदी ही मंदी है बस सरकार की चांदी ही चांदी है!

कल रात क्या क़ानून लागु हो जाये यह कोई नहीं जानता बस देखते जाएँ और हर मौसम का मज़ा लेते रहें,भारत में आज कल बहुत सुहाना मौसम होता है,लेकिन अब यह कोई नहीं कह सकता की " आजा मेरी गाड़ी में बैठ जा " यह आर्टिकल आप सब को कैसा लगा मुझे जरूर बताएं और दोस्तों को भी शेयर करें-धन्यवाद

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